
शाम का वक्त था वो अपने कमरे मे थी, अभी वो वो सब सोच रही थी जो आज सुबह हुआ था, कैसे अभिमान की उंगलियो पर उसका orgasm आ गया था, कैसे वो अपने आप को पुरा भूल गयी थी ।
साहिबा ने अपना सिर पकड़ लिया " बस यही कसर रह गई थी सीधा उसकी गोद में वो सब..!! " साहिबा का चहरा सोच कर ही गर्म हो गया, उस वक्त तो वो सब भूल गयी थी लेकिन अब मन कर रहा था कि गड्ढा खोद खुद ही उसमे कूद जाये।







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